क्या था वो
एक छोटा सा खाली कमरा ही तो था
जहां सिर्फ मैं और मेरे ख्वाब रहते
जहां मैं और मेरे सवाल रहते थे
मेरे बेवकूफी वाले अंदाज रहते थे
तो मेरी हरकतों पर हसंते सवाल रहते थे
था क्या वो
सिर्फ एक कमरा ही तो था
नहीं, वो कमरा नहीं जिंदगी का राज़दार था
था तो छोटा लेकिन बड़ा दिलदार था
था क्या वो
एक ईंट पत्थर से बना ढांचा
इंसानों की भीड़ मे वे इकलौता साफ दिल अहसास था
सोचने के लिए पूरा का पूरा खाली दिमाग
क्योंकि वो कमरा नहीं मेरा पहला प्यार था।


